Articles by "Economic"
Showing posts with label Economic. Show all posts


पूंजी बाजार भारतीय वित्‍तीय प्रणाली का सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण खण्‍ड है। यह कंपनियों को उपलब्‍ध एक ऐसा बाजार है जो उनकी दीर्घावधिक निधियों की जरुरतों को पूरा करता है। यह निधियां उधार लेने और उधार देने की सभी सुविधाओं और संस्‍थागत व्‍यवस्‍थाओं से संबंधित है। अन्‍य शब्‍दों मेंयह दीर्घावधि निवेश करने के प्रयोजनों के लिए मुद्रा पूंजी जुटाने के कार्य से जुड़ा है। 

इस बाजार में कई व्‍यक्ति और संस्‍थाएं (सरकार सहित) शामिल हैं जो दीर्घावधि पूंजी की मांग और आपूर्ति को सारणीबद्ध करते हैं और उसकी मांग करते हैं। दीर्घावधि पूंजी की मांग मुख्‍य रूप से निजी क्षेत्र विनिर्माण उद्योगों, कृषि क्षेत्रव्‍यापार और सरकारी एजेंसियों की तरफ से होती है। जबकि पूंजी बाजार के लिए निधियों की आपूर्ति अधिकतर व्‍यक्तिगत और कॉर्पोरेट बचतोंबैंकोंबीमा कंपनियांविशिष्‍ट वित्‍त पोषण एजेंसियों और सरकार के अधिशेषों से होती है।
भारतीय पूंजी बाजार स्‍थूल रूप से गिल्‍ट एज्‍ड बाजार और औद्योगिक प्रतिभूति बाजार में विभाजित है -

सांविधिक चलनिधि अनुपात वाणिज्यिक बैंक  के लिए वह राशि है जो बैंक को अपने ग्राहकों के लिए ऋण उपलब्ध कराने से पहले नकदीया सोनेया सरकार द्वारा अनुमोदित प्रतिभूतियों/ऋणपत्र (बांड) के रूप में बनाये रखनी होती हैसांविधिक चलनिधि अनुपात दर भारतीय रिजर्व द्वारा बैंक क्रैडिट के विस्तार को नियंत्रित करने के लिए निर्धारित और पोषित करती है।

सांविधिक चलनिधि अनुपात (SLR) की अधिकतम सीमा 40% है|
एन.डी.टी.एल ( NDTL) का वर्तमान सांविधिक चलनिधि अनुपात 22% है|
बेसिस पॉइंट क्या है ?  
यह प्रतिशत टर्म में ब्याज दर में वृद्धि हैउदाहरणस्वरूप,यदि ब्याज दर में 50 बेसिस पॉइंट की वृद्धि हो गयी तो इसका अर्थ होगा की ब्याज दर 0.50% बढ़ेगीएक प्रतिशत पॉइंट को 100 बेसिस पॉइंट में तोडा जाता हैइस प्रकार से 2% से 3% की वृद्धि 1 प्रतिशत पॉइंट अथवा 100 बेसिस पॉइंट है|
no image

List of Important GK questions from Economics and Commerce for SSC exam were given here. Candidates those who are all preparing for SSC CHSL, FCI Exam and all other competitive exams can use this material.

1).The major finance for small scale industries is_______.
a)    Shares and debentures
b)    Bank loans
c)    Public deposits
d)    Foreign aid